रविवार, नवंबर 23

छोटे छोरे ने मारी बाजी

एक बार फिर गरीबी के दलदल में कला का कँवल खिल गया. पूरे दुनिया के धुरंधर योद्धा उस जंग में शामिल थे, और सबका सपना एक, बिग बॉस का खिताब पाना. मगर लोगों की तमाम मशक्कतों को पछाड़ते हुए सहारनपुर के नाचीज़ छोरे ने फतह हासिल की, और अपने नाम कर लिया बिगबोस का खिताब, saharanapur के छोटे से ढाबे में काम करने वाले इस छोरे का मीडिया की सुर्खियों में आकर पहचान बनाना उन शब्दों को आवाज़ देता है जो यह साबित करते हैं, की सरस्वती पैसे वालों की बपूती नही होती, जो उसे पैसों से खरीदा जाए. एक स्थानीय अखबार में आशु के यह शब्द दिल को चीर गए की, जो आसमान लोग सीडियां लगाकर छूते हैं, मैंने उस आसमान को टांगो पर खड़े होकर छुआ है. सच ही तो है, आशुतोष की कला का जूनून और जीत की जंग ने उसे धुरंधरों की भीड़ में अलग पहचान दी.हालाँकि मेरठइओं के दिलों पर राज करने वाला राजा विजय मुकुट से अछूता रह गया, मगर लोगों के मोहब्बत और pyar ने पहचान का जो ताज उसे diyaa वो काबिले-तारीफ़ है,

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