गुरुवार, मार्च 18

एक थी नर्मदा mai


बच्चों आज की कहानी है नर्मदा माई की कहानी जो कभी गौंडवाना साम्राज्य की देवी थी, और बाद में विकास का आहार बन गई। जिसके किनारे बैठ महेश्वर में पत्रकारों के जमावड़े लगते थे, थो कभी रानी अहिल्या के तलवार चमकती थी।
कुछ यूँ किस्से होंगे आज से दस साल बाद जब आगामी फसल को हम महाकौशल की शान और जान नर्मदा माई के बारे में कहेंगे या फिर कोई नदी की तस्वीर दिखाकर उसे नर्मदा बोलेंगे। मुग़ल साम्राज्य और कृष्ण-राधा के किस्सों की माफिक माँ नर्मदा का किनारा भी एक दिन महज किस्से कहानी बन जायेगा.आने वाले पीढियां नर्मदा keशांत तट पर स्वेत धारा नै बाँध देखेंगे।
आपकी अपनी माँ नर्मदा का अस्तित्व जा रहा है और आप चुप हैं कब बोलेंगे जब नर्मदा के तट बांधों से घिर jऐयेंगे उठो और बोलो नर्मदा बचाओ

जो चमकी किस्मत बनकर तेरी
वो आज तुझे पर भारी थी
वो रोती रही महज इसलिए की नर्मदा भी एक नारी thi