जागते रहो, मौत रात को dastak देती है
ना जाने कोई...........कातिल रातों का राज
.1966 में एयर इंडिया का प्लेन क्रेश होने के कारन ११७ लोग मारे गए
.२ डिसेम्बर १९८४ भोपाल गैस कांड.
.२१ माय ११९७ रात ४:३० बजे भूकंप के कारण कई जिंदगी तबाह हो गई.
.२६ जनुअरी २००५ गुज़रात भुज भूकंप
.१६ may २००८ जयपुर सीरियल ब्लास्ट.
.२६ नॉम्वेबेर २००८ रात ९:३० बजे मुंबई में bomb ब्लास्ट.
चाहे बारूद के पीठ पर सवार मौत हो, या जमीन के गुस्से का कहर, ये सोचने वाली बात है की, मौत का तांडव हमेशा रात को ही रचा जाता है. कई ऐसी घटनाएं हैं, जिन्होंने हजारों जिन्दगिओं को रात के अंधेरे में निगल लिया. दोस्तों! ये घटनाएँ सबक दे रही हैं, kee रात सोने को नही, बल्कि जागते रहने को आती है. अगर आज रात १२ बजे के बाद खाकी वर्दी वाला गोरखा आपकी galee में सीटी बजाकर जागते रहो............... की जानकारी न दे, तो भी अपनी सतर्कता में कमी ना आने दें, क्या पता ये रात सुबह का सूरज डूबा दे. क्यूंकि आपकी सुरक्षा आपके अपने हाथ hai
बुधवार, नवंबर 26
ग़मों को कैश करता मनोरंजन
मर्डर मिस्ट्री में चर्चित हुईं मिस मेरठ के लिए इतनी publicity कम थी, जो अब उन पर फ़िल्म बनाने और उपन्यास लिखने की मंत्रदायें गडी जा रहीं हैं. मनोरंजन के लिए बनने वाली फिल्में अब भावनाओं को कैश कर रही हैं. मोहब्बत, रिश्तों और samaajik विषयों से भरा मनोरंजन इन दिनों, घटना प्रधान जिंदगी बसर कर रहा है. क्या seekh रहे हैं हमारे बच्चों का जुमला जहाँ देशभर में रटा जा रहा है, धार्मिक किस्से-कहानियो के पात्रों को एनीमेशन की रोचकता का jaama पहनाकार बाजार में उतारा जा रहा है, तो ऐसे में प्रियंका-अंजू जैसी ansuljhi मर्डर मिस्त्रियाँ, आरुशी हत्याकांड जैसे तमाम घटनाओं को मनोरंजन बाज़ार में उतारना कितना सही है? मेरठ का मोलीवुड हो या बम्बैया बोलीवुड की नक़ल ही कहा जाए, की निर्देशकों के साथ साहित्यकारों के पास भी लिखने के लिए केवल बिग्बोस के राजा-आशु और मर्डर मिस्ट्री की प्रियंका-अंजू ही रह गईं
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