तमन्ना है दिल की इतनी उस वक्त जस्न होगा
जब हम फतह करेंगे दुनिया को रश्क होगा
फ़िर महफिलें सजेंगी आलम तो ये ही होगा
इफ्तार की तरह ही जलसा-ऐ- मुल्क होगा
नही हैं हम बेगेरत अकेले हम से कुछ ना होगा
आप और खुदा की नियामत हो तो कैसे कुछ ना होगा
हसरतों को हमारी अंजाम पाना होगा
काबिल है गर हम तो पहचान पाना होगा
hasraton को कोई मेरे रोक ना सकेगा
तमन्ना को हमारी पूरा ही होना होगा,
पूरा ही होना hoga
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