रविवार, नवंबर 30
किस्सों में शामिल होगी दास्ताँ
काले धुंए के बवंडरों और आग की लपटों के बीच, दहलती, सिसकती मुंबई. फिल्मी आम्चिक मुंबई के ड्यालाग से गूंजने वाली मुंबई की फिजा में इन दिनों दर्द, कराह और चीखों की आहें, पनाह मांग रही हैं. साथ ही पनाह मांग रही हे, उनकी आत्मा. जिन्होंने एक बार फ़िर वतन की खातिर ख़ुद को न्योछावर कर दिया. आज एक न्यूज़ चॅनल ने काफी बहेतरीन तरीके से सहीदों की विजयगाथा से परिचित कराया. आने वाली पीदीयाँ या तो एनीमेशन फिल्मों के कार्टून किरदारों के तौर पर इन्हें जानेगी, या फ़िर वक्त के सिमटने की गर्द इनके इतिहास की किताबों पर चदकर इन्हें किसी संग्रहालय में दर्शनीय बना देंगी.
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sahi hai boss
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