रविवार, जुलाई 17

कंदील का कातिल कौन, समाज या सोच 
मेरी एक मित्र हैं, जो महिला उत्त्थान के लिए अपनी एक संस्था चलती हैं. आज लंबे वक्त बाद उनका फ़ोन आया और कहने लगी, पाकिस्तान में कितना गलत हुआ, इतनी अच्छी मॉडल कंदील को उसके भाई ने ही मार दिया, हत्यारे को फांसी होनी चाहिए तभी कंदील को न्याय मिलेगा. उनकी बात से थोड़ा देर मुझे भी लगा की यही होना चाहिए लेकिन क्या ऐसे फांसी देने से बदलाव संभव है. फांसी उस हत्यारी मानसिकता को मिलनी चाहिए जिसने महिला की आज़ादी को इस्लाम के खिलाफ समझा है...

ये मेरी अपनी राय है

अपनी यह बात मैंने दोपहर में अपने फेसबुक वाल पर लिखी थी, लेकिन शाम को जब एक चैनल ने कंदील
 बलोच पर स्पेशल कार्यक्रम. में कंदील  बोल रही हूँ दिखाया तो अपनी यह बात  सही मिली, तस्लीमा की पंक्तियों से कंदील के  मन की बात पड़ने की कोशिश  ,लेकिन सवाल वही कायम था. उसने  कहा मेरी  शादी एक ऐसे आदमी से हुई  जो उम्र में मुझसे बड़ा था   ,कंदील खुलकर जीना चाहती थी, लेकिन समाज ने उसके साथ ऐसा किआ  जहाँ से निकलना मुश्किल था, लेकिन उसने हार नहीं मानी  और अपने लिए  वो रास्ता चुना  जिसे वो प्यार करती थी. खुस रहने वाली कंदील तो चली गई लेकिन अपने पीछे सवाल दे गई मेरा कातिल कौन  समाज या सोच